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Tuesday, August 1, 2017

राजनीति समुच्चय पुस्तक प्रकाशित हो चुकी है।

इस किताब को कौटिल्य द्वारा संस्कृत भाषा में लिखा गया था, करीब ढाई हजार साल पहले। मैंने इस किताब को इसके पहले भी अंग्रेजी में लिखा है। लेकिन मैं इसे हिंदी में भी लिखना चाहता था। नतीजतन, यह वर्तमान संस्कृत-हिंदी संस्करण आपके हाथों में उपलब्ध है। मैंने इस पुस्तक में मेरी सबसे ज्यादा कोशिश की है, कि इसमें कोई गलती नहीं होऔर ये चारों ओर उपलब्ध पुस्तकों का एक बेहतर संस्करण हो।

यह पुस्तक एक अप्रत्यक्ष साथी और एक वफादार दोस्त के रूप में व्यक्ति के लिए उपयोगी है। धन, सुख, दुख, भाग्य, अनुग्रह, कर्तव्य, बलिदान, शिक्षा और गुणों आदि विषयों का इस पुस्तक में अद्भुत समावेश होता है। व्यक्ति के जीवन में, यह पुस्तक हर एक कदम पर सहायक है और जीवन के हर पहलू में सहायता करती है। इस पुस्तक में वर्णित सूत्रों के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति बर्ताव करता है, तो वह दुख से दूर हो जाता है और अपने जीवन में सुख, समृद्धि और शांति का अनुभव करता है, जो मनुष्य के लिए खोज, भ्रम और प्यास है। इसलिए, व्यक्ति को अपने जीवन में कम से कम एक बार इस पुस्तक का अध्ययन अवश्य ही करना चाहिए।

यद्यपि यह पुस्तक मूल रूप से संस्कृत भाषा में है, परंतु यह हिन्दी भाषा में भी उतनी ही दिलचस्प है, प्रेरणादायक है और हिंदी में ज्ञान भी बढ़ रहा है। मुझे न केवल आशा है, लेकिन मुझे उस पर पूरा विश्वास है, यह पुस्तक निश्चित रूप से आपसे प्यार करती है और आपके ज्ञान और प्रेरणा को बढ़ाती है। इस पुस्तक में हर जगह प्रयास किया गया है कि आप इसे पढ़कर एक बेहतर व्यक्ति बनने की कोशिश करेंगे।

यह पुस्तक हिंदी भाषा में लिखना उतनी आसान नहीं थी, लेकिन मैंने फिर भी इस किताब को हिंदी में लिखा है, ताकि हर व्यक्ति जो हिंदी भाषा को जानता हो, इस पुस्तक को समझ सके और इसका लाभ उठा सके। मैंने यह बहुत अच्छी तरह से कोशिश की है कि यह पुस्तक पूरी तरह से शुद्ध और त्रुटियों से मुक्त हो, लेकिन यह बहुत संभव है कि मेरे पूरे दिल से प्रयासों के बाद भी त्रुटियां शेष रहें। मैं हमेशा उन कमियों अथवा त्रुटियों को स्वाभाविक रूप से दूर करने और भविष्य के अपडेट में आवश्यक परिवर्तन करने के लिए उत्सुक हूं।

यह पुस्तक यहां उपलब्ध है।

Friday, July 7, 2017

राजनीति समुच्चय प्रकाशित होने वाली है।

यह पुस्तक लगभग ढाई हजार साल पहले संस्कृत में लिखी गई थी। मैंने यह पुस्तक पहले भी अंग्रेजी में लिखी है। परंतु इसको हिंदी में भी लिखने की मेरी इच्छा हुई। मैंने इस पुस्तक में हर जगह कोशिश की है कि इसमें कोई कमी न रह जाए। यद्यपि यह पुस्तक संस्कृत में है परन्तु यह हिंदी में भी उतनी ही ज्ञान वर्धक है। मुझे आशा ही नहीं विश्वास है कि यह पुस्तक आपको अवश्य पसंद आएगी।
इस पुस्तक में हर जगह कोशिश की गई है कि आप इसे पढ़कर एक अच्छा इंसान बनने की कोशिश करेंगे। इस पुस्तक को हिंदी में लिखना उतना आसान नहीं था परंतु मैंने इस पुस्तक को फिर भी हिंदी में लिखा, ताकि हर व्यक्ति जो हिंदी जानता है वह इस पुस्तक को समझ सके तथा इसका लाभ ले सके। मैंने यह पूरी तरह प्रयत्न किया है कि यह पुस्तक पूर्ण रूप से शुद्ध हो परन्तु यह बहुत सम्भव है कि प्रयत्न करने के उपरांत भी कोई कमी रह गई हो। उसके दूर करने के लिए मैं हमेशा तत्पर हुं।

© परमहंस जिदानन्द

यह पुस्तक यहां उपलब्ध है।